DUMKA NEWS आदिवासी संस्कृति की भव्य झलक, ढोल की थाप पर थिरके सांसद और अधिकारी।

4 Min Read

शिकारीपाड़ा ब्लॉक मैदान बुधवार को आदिवासी संस्कृति और परंपरा के रंगों से सराबोर हो उठा। अवसर था ‘युवा संघ’ और ‘ग्राम प्रधान मांझी संगठन’ के तत्वावधान में आयोजित सोहराय मिलन समारोह का। इस भव्य आयोजन में न केवल पारंपरिक नृत्य और संगीत की गूंज रही, बल्कि समाज की एकता और प्रकृति के प्रति प्रेम का अनूठा संदेश भी देखने को मिला।

पूजा-अर्चना और दीप प्रज्वलित कर हुआ शुभारंभ

कार्यक्रम की शुरुआत पूरी तरह से विधिविधान के साथ की गई। सबसे पहले प्रकृति और ईष्ट देवों की पूजा-अर्चना कर सुख-समृद्धि की कामना की गई। इसके पश्चात मुख्य अतिथि सांसद नलिन सोरेन, जिला परिषद अध्यक्ष जॉयस बेसरा, प्रखंड विकास पदाधिकारी मोहम्मद एजाज आलम और अंचलाधिकारी कपिल देव ठाकुर ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का विधिवत उद्घाटन किया।

जब अतिथियों ने थामा मांदर और ढोल

समारोह का मुख्य आकर्षण वह पल रहा जब सांसद नलिन सोरेन, प्रखंड विकास पदाधिकारी मोहम्मद एजाज आलम और अंचलाधिकारी कपिल देव ठाकुर ने खुद पारंपरिक ढोल बजाना शुरू किया। मांदर और ढोल की थाप सुनते ही मैदान में मौजूद लोग थिरकने लगे। कार्यक्रम में शामिल सभी लोग अपनी पारंपरिक आदिवासी वेशभूषा में नजर आए, जो इस समारोह की शोभा को दोगुना कर रहा था।

सोहराय: प्रकृति और पशुधन के प्रति कृतज्ञता का महापर्व

सोहराय झारखंड की समृद्ध संस्कृति का एक अभिन्न हिस्सा है। यह सिर्फ एक त्योहार नहीं, बल्कि आदिजीजीविषा और प्रकृति के सामंजस्य का प्रतीक है।


पशुधन की पूजा: यह पर्व मुख्य रूप से पशुधन (मवेशियों) के प्रति आभार व्यक्त करने के लिए मनाया जाता है। किसान अपने गाय-बैलों को नहलाते हैं, उन्हें सजाते हैं और उनकी पूजा करते हैं, क्योंकि वे कृषि और जीवन का आधार हैं।
कला और दीवारें: सोहराय के दौरान आदिवासी महिलाएं अपने घरों की दीवारों पर प्राकृतिक रंगों से सुंदर आकृतियां बनाती हैं, जिसे ‘सोहराय आर्ट’ कहा जाता है। इसमें फूल-पत्ती, पशु-पक्षी और प्रकृति के दृश्यों को उकेरा जाता है।
सामूहिकता का संदेश: सोहराय मिलन समारोह जैसे आयोजन समाज के बिखराव को रोकते हैं और नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ते हैं। मांदर की थाप और नृत्य की कतारें बताती हैं कि एकता ही इस संस्कृति की सबसे बड़ी ताकत है।

सांसद नलिन सोरेन ने बताया सोहराय का महत्व

कार्यक्रम के दौरान मीडिया से बात करते हुए सांसद नलिन सोरेन ने सोहराय पर्व के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा:
“सोहराय पर्व हम फसल की उपज की खुशी में मनाते हैं। जब फसल कटकर खलिहान में आती है, तो उस खुशी को साझा करने के लिए यह पांच दिनों का उत्सव मनाया जाता है। पुराने समय में, जब ट्रैक्टर नहीं थे, तब बैल ही खेती का मुख्य आधार थे। सोहराय के दौरान हम उन बैलों और पशुधन को विशेष सम्मान देते हैं जिन्होंने हमारे खेतों में हल चलाया और जिनके कारण आज हमारे पास उपज है। उन्हें नहला-धुलाकर और सजाकर उनकी पूजा की जाती है।”
उन्होंने आगे बताया कि यह पर्व पांच दिनों तक चलता है, जिसकी शुरुआत ‘नहाने’ की रस्म से होती है और समापन ‘सकरात’ (शिकार) के साथ होता है।

कार्यक्रम में मुख्य रूप से झामुमो प्रखंड सचिव प्रभुनाथ हांसदा , झाबुआ प्रखंड अध्यक्ष चुंडा हेंब्रम, एसआई आनंद हेंब्रम आदि गणमान्य लोग उपस्थित थे। कार्यक्रम का सफल आयोजन में भीम सोरेन, अशोक मुर्मू, दुलाल बेसरा, करण मुर्म, रमेश टुडू, चान्दो बास्की, जिप सदस्य प्रकाश हंसदा, मोतीलाल का अहम योगदान रहा।

Share This Article
Leave a comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *