इचाक (हजारीबाग): प्रखंड के गुंजा ग्राम में शुक्रवार को समाज की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जिसमें सामाजिक परंपराओं और रीति-रिवाजों को लेकर दूरगामी निर्णय लिए गए। बैठक में पुरुषों के साथ-साथ महिलाओं ने भी बढ़-चढ़कर अपनी भागीदारी सुनिश्चित की।
मृत्यु भोज: दबाव नहीं, आस्था को प्राथमिकता
बैठक का मुख्य केंद्र बिंदु ‘मृत्यु भोज’ से जुड़े नियम रहे। समाज ने सर्वसम्मति से यह ऐतिहासिक निर्णय लिया कि मृत्यु भोज को लेकर किसी भी परिवार पर कोई सामाजिक दबाव नहीं बनाया जाएगा।
- प्रत्येक परिवार अपने पूर्वजों की परंपरा और व्यक्तिगत आस्था के अनुसार निर्णय लेने के लिए स्वतंत्र है।
- समाज इस मामले में किसी भी प्रकार का अवरोध उत्पन्न नहीं करेगा।
कांग्रेस नेता डॉ. आरसी प्रसाद मेहता का सामाजिक बहिष्कार
सकारात्मक चर्चा के बीच, बैठक में कांग्रेस नेता डॉ. आरसी प्रसाद मेहता के आचरण पर गहरा असंतोष व्यक्त किया गया। उन पर आरोप है कि उन्होंने अपने भाई की मृत्यु के उपरांत पारंपरिक रूप से बाल-दाढ़ी नहीं बनवाई और ब्रह्म भोज को भी बंद कराने की पहल की।
समाज ने इसे अपनी जड़ों और संस्कृति के खिलाफ मानते हुए लंबी चर्चा की। अंततः सामूहिक निर्णय लिया गया कि डॉ. मेहता को गांव से ‘आजात’ (सामाजिक बहिष्कार) किया जाएगा। ग्रामीणों का तर्क है कि समय के साथ बदलाव स्वीकार्य है, लेकिन अपनी मौलिक संस्कृति और सभ्यता से समझौता नहीं किया जा सकता।
बैठक में उपस्थित गणमान्य
शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुई इस बैठक में मुख्य रूप से राजकिशोर प्रसाद मेहता, सुरेंद्र प्रसाद मेहता, द्वारिका प्रसाद मेहता, किशोरी नंदन मेहता, प्रवीण प्रसाद मेहता, अर्जुन प्रसाद मेहता, प्रदीप मेहता, तालेश्वर प्रसाद मेहता, सुगन महतो, नरेश प्रसाद मेहता, अशोक प्रसाद मेहता, निर्मल प्रसाद मेहता उर्फ नींमु मेहता, यमुना प्रसाद मेहता, सूरज प्रसाद मेहता, बंसी प्रसाद मेहता, कमल महतो, प्रभु चंद मेहता, फुलेश्वर मेहता, शंकर मेहता, बंगाली मेहता, श्री शिव प्रसाद मेहता एवं मिथिलेश प्रसाद मेहता शामिल थे।
साथ ही महिला शक्ति के रूप में गीता देवी, उर्मिला देवी, बसंती देवी, लक्ष्मी कुमारी, चंपा देवी, संगीता देवी एवं भुवनेश्वरी देवी ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।
