डॉ. कुणाल हजारी और टीम ने किया जटिल ‘हार्ट रप्चर’ ऑपरेशन
रिपोर्ट-विनय कुमार
रांची: राजधानी के धुर्वा स्थित पारस एचईसी अस्पताल ने चिकित्सा क्षेत्र में एक और बड़ी उपलब्धि हासिल की है। अस्पताल के अनुभवी सर्जनों ने एक 32 वर्षीय युवक की अत्यंत दुर्लभ और जानलेवा हृदय बीमारी ‘रप्चर्ड साइनस ऑफ वलसाल्वा’ (Ruptured Sinus of Valsalva) का सफल ऑपरेशन कर उसे मौत के मुंह से बाहर निकाल लिया है।
क्या थी बीमारी और क्यों था जान का खतरा?
मरीज एक जन्मजात हृदय रोग से पीड़ित था। इस स्थिति में शरीर की मुख्य धमनी (Aorta) में गुब्बारे जैसा उभार बन जाता है। इस मामले में वह उभार फट चुका था और खून का रिसाव सीधे दिल के ‘राइट एट्रियम चैंबर’ में हो रहा था।
- जोखिम: धमनी फटने से अचानक मृत्यु की संभावना बहुत अधिक रहती है।
- जटिलता: रिसाव के कारण दिल के अन्य हिस्सों पर दबाव बढ़ रहा था और मरीज की स्थिति लगातार नाजुक होती जा रही थी।
आर्थिक तंगी बनी थी बाधा, पारस में मिला सहारा
मरीज ने इससे पहले अन्य अस्पतालों में भी संपर्क किया था, लेकिन भारी खर्च के कारण इलाज संभव नहीं हो पा रहा था। अंततः वह पारस एचईसी अस्पताल पहुँचा, जहाँ डॉक्टरों ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए तुरंत इमरजेंसी सर्जरी का फैसला लिया।
सर्जरी की मुख्य बातें
वरिष्ठ सीटीवीएस सर्जन डॉ. कुणाल हजारी और उनकी टीम ने इस बेहद जटिल ऑपरेशन को अंजाम दिया:
- मल्टीपल रिपेयर: फटी हुई धमनी की मरम्मत के साथ-साथ दिल के तीन प्रमुख वाल्वों (एओर्टिक, माइट्रल और ट्राइकसपिड) की भी सफल रिपेयरिंग की गई।
- रिकवरी: सर्जरी के मात्र 5 दिन बाद मरीज को छुट्टी दे दी गई।
- वर्तमान स्थिति: ऑपरेशन के एक महीने बाद टांके कटवाने आए मरीज को डॉक्टरों ने पूरी तरह स्वस्थ पाया है।
“झारखंड में पिछले 17–18 वर्षों में यह इस तरह का मेरा 10वां सफल केस है। मुझे उम्मीद है कि अगले 2-3 वर्षों में मरीज बिना किसी दवा के सामान्य जीवन जी सकेगा।” — डॉ. कुणाल हजारी, वरिष्ठ सीटीवीएस सर्जन
अत्याधुनिक सुविधाओं से मिल रहा गरीबों को लाभ
अस्पताल के फैसिलिटी डायरेक्टर डॉ. नीतेश कुमार ने बताया कि अस्पताल में मौजूद वर्ल्ड-क्लास इंफ्रास्ट्रक्चर और अनुभवी डॉक्टरों की बदौलत ही ऐसी जटिल सर्जरी संभव हो पा रही हैं। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि आयुष्मान भारत जैसी योजनाओं के माध्यम से आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लोगों को भी उच्च स्तरीय स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करना अस्पताल की प्राथमिकता है।
बड़ी बात: इस सफल सर्जरी ने साबित कर दिया है कि अब झारखंड के मरीजों को गंभीर हृदय रोगों के इलाज के लिए बड़े महानगरों की ओर रुख करने की जरूरत नहीं है।
