रांची (झारखंड)। झारखंड की सांस्कृतिक, धार्मिक और प्राकृतिक पहचान की संवाहिका ‘स्वर्णरेखा नदी’ को प्रदूषण मुक्त बनाने और इसके अस्तित्व को बचाने के लिए राजधानी रांची में एक बड़े जनआंदोलन की शुरुआत हो चुकी है। आज दिनांक 14 जून 2026 (रविवार) को ‘स्वर्णरेखा जीर्णोद्धार समिति’ एवं रांची नगर निगम के वार्ड संख्या 13 के लोकप्रिय पार्षद पवन तिर्की की संयुक्त अध्यक्षता में “स्वर्णरेखा नदी संरक्षण संदेशात्मक श्रमदान अभियान” का ऐतिहासिक शुभारंभ किया गया।
चुटिया स्थित पवित्र एवं प्राचीन ‘इक्कीसी महादेव मंदिर प्रांगण’ के स्वर्णरेखा तट से शुरू हुए इस महाअभियान में विभिन्न सामाजिक, धार्मिक, शैक्षणिक संगठनों के प्रतिनिधियों, पर्यावरणविदों, बुद्धिजीवियों, जनप्रतिनिधियों और भारी संख्या में स्थानीय नागरिकों ने अपनी गरिमामयी उपस्थिति दर्ज कराई और श्रमदान कर जागरूकता का शंखनाद किया।
“नदी केवल जलधारा नहीं, हमारी संस्कृति का आधार है” — सामूहिक संकल्प
अभियान के शुभारंभ के अवसर पर मंदिर परिसर और नदी तट पर उपस्थित सैकड़ों लोगों ने एक सुर में यह संकल्प लिया कि स्वर्णरेखा नदी पूरे झारखंड की जीवनरेखा है। इसके संरक्षण, संवर्धन और स्वच्छता की जिम्मेदारी केवल सरकार या प्रशासन की नहीं है, बल्कि समाज के प्रत्येक नागरिक का यह परम कर्तव्य है।
कार्यक्रम में वक्ताओं ने पुरजोर तरीके से यह संदेश दिया कि नदियाँ केवल पानी की धारा नहीं होतीं, बल्कि वे हमारी समृद्ध संस्कृति, जन-आस्था, पर्यावरण के संतुलन और आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य का मुख्य आधार हैं। यदि आज हम अपनी नदियों को नहीं बचाएंगे, तो हमारा अस्तित्व भी संकट में पड़ जाएगा।
प्रतिदिन 45 MLD दूषित जल स्वर्णरेखा को बना रहा नाला: माखन पाठक की गंभीर चेतावनी
स्वर्णरेखा जीर्णोद्धार समिति के अध्यक्ष माखन पाठक ने नदी की वर्तमान दुर्दशा पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कई महत्वपूर्ण और चौंकाने वाले तकनीकी आंकड़े सामने रखे। उन्होंने कहा:
“वर्तमान समय में रांची की हरमू नदी के माध्यम से प्रतिदिन लगभग $45\text{ MLD}$ (मिलियन लीटर प्रतिदिन) दूषित जल, सीवेज का गंदा पानी, मल-मूत्र और अन्य जहरीले रासायनिक अपशिष्ट सीधे और बिना किसी ट्रीटमेंट के स्वर्णरेखा नदी में प्रवाहित हो रहे हैं। यह स्थिति अत्यंत भयावह है।”
माखन पाठक ने राज्य सरकार और जिला प्रशासन से अत्यंत तल्ख शब्दों में मांग की कि:
- वर्तमान की गंभीर परिस्थितियों को देखते हुए अविलंब $45\text{ MLD}$ क्षमता का आधुनिक सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) स्थापित किया जाए।
- जब तक प्लांट नहीं बनता, तब तक किसी वैकल्पिक माध्यम या डायवर्जन से हरमू नदी के इस अत्यधिक प्रदूषित जल को स्वर्णरेखा नदी में मिलने से तुरंत रोका जाए।
- उन्होंने कड़े लहजे में चेतावनी देते हुए कहा कि यदि समय रहते सरकार ने इस दिशा में कोई ठोस और प्रभावी कदम नहीं उठाए, तो आने वाले कुछ ही वर्षों में पवित्र स्वर्णरेखा नदी पूरी तरह से एक गंदे नाले का रूप धारण कर लेगी, जिससे रांची और पूरे राज्य की जनता एक अमूल्य प्राकृतिक जलस्रोत से हमेशा के लिए वंचित हो जाएगी।
“स्वर्णरेखा हमारी माँ के समान” — प्रमुख प्रतिनिधियों के विचार
कार्यक्रम में उपस्थित विभिन्न संगठनों के मार्गदर्शकों और प्रतिनिधियों ने नदी संरक्षण को लेकर अपने विचार साझा किए:
- पार्षद पवन तिर्की: वार्ड 13 के पार्षद पवन तिर्की ने स्थानीय जनता को संबोधित करते हुए कहा कि, “स्वर्णरेखा नदी हमारी माँ के समान है। इसे स्वच्छ, अविरल और निर्मल बनाए रखना हमारी नैतिक जिम्मेदारी के साथ-साथ एक बड़ा सामाजिक दायित्व भी है। स्वर्णरेखा केवल हमारा वर्तमान नहीं है, बल्कि यह हमारी आने वाली पीढ़ी का भविष्य भी है।”
- कैलाश केशरी (विश्व हिन्दू परिषद): विहिप के वरिष्ठ नेता कैलाश केशरी ने कहा कि, “स्वर्णरेखा झारखंड की आध्यात्मिक जीवनरेखा है। इसके लगातार बढ़ते प्रदूषण से न केवल क्षेत्र के पर्यावरण को अपूरणीय क्षति पहुँच रही है, बल्कि करोड़ों सनातनी भाई-बहनों की धार्मिक आस्था भी बुरी तरह आहत हो रही है। इस पावन नदी को बचाना धर्म और पर्यावरण दोनों की रक्षा है।”
- दरिद्र नारायण भोज समिति (सूरज महतो एवं जनक महतो): इन्होंने स्थानीय स्तर पर आवाज उठाते हुए मांग की कि चुटिया और उसके आसपास के क्षेत्रों के सभी पारंपरिक नदी-तालाबों और जलस्रोतों का जीर्णोद्धार और संरक्षण किया जाए, जिसमें स्वर्णरेखा नदी के संरक्षण को सबसे शीर्ष प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
- विक्रम साहू (बजटंग दल संयोजक): बजरंग दल के संयोजक विक्रम साहू ने युवाओं का आह्वान करते हुए घोषणा की कि स्वर्णरेखा नदी के संरक्षण, घाटों की सफाई और व्यापक जनजागरूकता अभियान को धरातल पर उतारने में बजरंग दल का एक-एक कार्यकर्ता अपनी सबसे सक्रिय और महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
समाज के हर वर्ग की अनुकरणीय भागीदारी
इस संदेशात्मक श्रमदान अभियान की सबसे खूबसूरत तस्वीर तब देखने को मिली जब चुटिया और रांची के विभिन्न प्रतिष्ठित संगठनों के पदाधिकारी और युवा कार्यकर्ता एक साथ झाड़ू, कुदाल और तगाड़ी लेकर नदी तट की सफाई में जुट गए। इस ऐतिहासिक अवसर पर मुख्य रूप से उपस्थित रहने वाले गणमान्य लोगों में शामिल थे:
| संगठन का नाम | उपस्थित मुख्य प्रतिनिधि |
| विश्व हिन्दू परिषद व बजरंग दल | कैलाश केशरी, विक्रम साहू, विनीत कुमार, विशाल, शुभम, दीपक कुमार |
| श्री महावीर मंडल केंद्रीय समिति, चुटिया | कृष्णा सहाय, संजीव महतो, संदीप केशरी |
| केंद्रीय मंडा पूजा समिति व सरना समिति | राजकुमार महतो, सूरज मुंडा |
| श्री महावीर मंडल (विभिन्न शाखाएं) | सुमित मिश्रा (केतारी बगान), राज सिंह, सुशील मुंडा, शुभम सिंह (आशिर्वाद क्लब), राजीव रंजन (तपोवन मंदिर) |
| सामाजिक व सेवा संगठन | संजीव साहू, पंकज साहू, सोनू यादव (हरिदेव सेवा संघ), पूजा साहू (साईंमिंग झारखंड), रंजीत राम (आई.जी.डी.सी. फाउंडेशन) |
इनके अलावा युवा और सामाजिक कार्यकर्ताओं में शुभम गिरी, राहुल राम, कुनाल भोक्ता, दिलीप गोप, नवीन तिवारी, शिवम वर्मा, अभिषेक राय, राहुल रॉकी, निखिल साहू, आनंद केशरी, नीतेश सिंह, राहुल राणा, तरुण राम, अभय सिंह, अंकित सिंह, हिमांशु कुमार, रोहित कुमार, वैभव सिंह और राजन साहू सहित सैकड़ों युवाओं ने पूरे उत्साह के साथ नदी तट से भारी मात्रा में प्लास्टिक और कचरा हटाकर श्रमदान किया।
हर सप्ताह ‘आधे घंटे’ के श्रमदान की भावुक अपील
स्वर्णरेखा जीर्णोद्धार समिति के बैनर तले इस अभियान के माध्यम से रांची के तमाम आम नागरिकों, व्यवसायियों और युवाओं से एक बेहद भावुक और जरूरी अपील की गई। समिति ने कहा कि लोग अपनी व्यस्ततम दिनचर्या और सप्ताह में से कुछ समय निकालें—चाहे वह केवल आधे घंटे (30 मिनट) के लिए ही क्यों न हो—लेकिन स्वर्णरेखा नदी की स्वच्छता, इसके घाटों के संरक्षण के लिए ‘श्रामदान’ अवश्य करें।
समिति के सदस्यों ने स्पष्ट किया कि यह कोई एक दिन का कार्यक्रम नहीं है। इस प्रकार के जनजागरूकता और श्रमदान अभियान अब प्रत्येक सप्ताह और निरंतर चलाए जाएंगे, ताकि चुटिया, रांची और इसके आसपास के ग्रामीण इलाकों के अधिक से अधिक लोगों को इस जनआंदोलन का हिस्सा बनाया जा सके और स्वर्णरेखा को उसके पुराने, स्वच्छ, निर्मल और प्रदूषणमुक्त स्वरूप में वापस लाया जा सके।
सरकार से दीर्घकालिक नीति बनाने का आग्रह
कार्यक्रम के समापन पर स्वर्णरेखा जीर्णोद्धार समिति और उपस्थित सभी प्रबुद्ध नागरिकों ने संयुक्त रूप से राज्य सरकार, नगर विकास विभाग और झारखंड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (JSPCB) से पुरजोर आग्रह किया कि चूंकि स्वर्णरेखा नदी सीधे तौर पर जनजीवन, पर्यावरण और आस्था से जुड़ी है, इसलिए इसके उद्गम स्थल से लेकर इसके पूरे बहाव क्षेत्र में प्रदूषण नियंत्रण के लिए कड़े नियम लागू किए जाएं और एक दीर्घकालिक, ठोस कार्ययोजना बनाकर इसका संवर्धन किया जाए।
अभियान के मुख्य गूंजते नारे:
- “आओ मिलकर करें संकल्प, स्वर्णरेखा को दें नया कल।”
- “स्वर्णरेखा को स्वच्छ रखें, दूषित होने से बचाएं।”
- “युवाओं ने ठाना है, स्वर्णरेखा को स्वच्छ बनाना है।”


