बोकारो: शहर के व्यस्ततम बोकारो रेलवे स्टेशन के पास टेंपो स्टैंड पर 22 फरवरी की शाम सरेआम हुई फायरिंग और सचिन यादव की हत्या ने पूरे जिले में सनसनी फैला दी थी। अपराधियों के इस दुस्साहस ने कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए थे, लेकिन जीआरपी (GRP), आरपीएफ (RPF) और बालीडीह पुलिस के त्रिकोणीय तालमेल (Coordination) ने महज 48 घंटे के भीतर इस हत्याकांड की गुत्थी सुलझा ली है।
सटीक सूचना और ‘राइट डायरेक्शन’ में एक्शन
घटना की गंभीरता को देखते हुए रेलवे प्रोटेक्शन फोर्स के मंडल सुरक्षा आयुक्त ओम प्रसाद मोहंती के निर्देश पर एक SIT (स्पेशल इन्वेस्टिगेटिंग टीम) का गठन किया गया। इसमें आरपीएफ इंस्पेक्टर संतोष कुमार, जीआरपी बोकारो और बालीडीह थाना प्रभारी नवीन कुमार की टीम ने साझा ऑपरेशन चलाया। पुलिस ने सटीक सूचना के आधार पर छापेमारी कर मुख्य आरोपी भोलू कर्मकार को मनसा सिंह गेट के पास से दबोच लिया।
बरामदगी और साक्ष्य
गिरफ्तार आरोपी भोलू की निशानदेही पर पुलिस ने हत्या में प्रयुक्त सामग्री बरामद की है:
- एक देसी पिस्टल और मैगजीन।
- घटना के वक्त पहना गया सफेद रंग का जैकेट।
- एक मोबाइल फोन।
हत्या की वजह: जीजा के अपमान का बदला
पुलिस अनुसंधान में यह बात सामने आई है कि यह हत्याकांड किसी बड़े गिरोह की आपसी रंजिश नहीं, बल्कि पुराने व्यक्तिगत विवाद का परिणाम था।
- विवाद की जड़: मुख्य आरोपी भोलू कर्मकार के बहनोई धनंजय कर्मकार का मृतक सचिन यादव के साथ पुराना विवाद था। दोनों के बीच अक्सर झड़प होती थी और एक-दूसरे को देख लेने की धमकी दी गई थी।
- बदले की आग: अपने बहनोई के अपमान से आक्रोशित होकर भोलू ने सचिन को रास्ते से हटाने की साजिश रची और 22 फरवरी की शाम टेंपो स्टैंड पर ताबड़तोड़ दो गोलियां दागकर उसे मौत के घाट उतार दिया।
फरार आरोपियों की तलाश जारी
इस कांड में कुल तीन नामजद आरोपी बनाए गए हैं। मुख्य आरोपी भोलू पुलिस की गिरफ्त में है, जबकि उसके दो सहयोगी धनंजय कर्मकार (बहनोई) और हसन शेख फिलहाल फरार हैं। पुलिस की टीमें उनकी गिरफ्तारी के लिए संभावित ठिकानों पर छापेमारी कर रही हैं।
“वर्दीधारियों के बीच बेहतर समन्वय और सूझबूझ भरी कार्रवाई का परिणाम है कि अपराधी आज सलाखों के पीछे है। रेल पुलिस उपाधीक्षक (चक्रधरपुर) मनीष कुमार की मेहनत और आरपीएफ-जीआरपी के जॉइंट ऑपरेशन ने पुलिस की साख को दोबारा बहाल किया है।”
सनसनी से राहत तक का सफर
22 फरवरी की उस शाम ने बोकारो स्टेशन पर दहशत का माहौल पैदा कर दिया था। आम लोग पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहे थे, लेकिन 48 घंटे के भीतर हुए इस खुलासे ने अपराधियों को कड़ा संदेश दिया है कि कानून के हाथ लंबे होते हैं। फिलहाल भोलू की गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने राहत की सांस ली है और बाकी बचे आरोपियों पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया है।
