चान्हो (रांची): प्रकृति पर्व सरहुल के पावन अवसर पर चान्हो प्रखंड के टांगर गांव में आदिवासी संस्कृति की अनूठी झलक देखने को मिली। यहाँ सदियों से चली आ रही सामूहिक मछली पकड़ने की पारंपरिक रस्म को पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ निभाया गया।
पूजा-अर्चना के बाद तालाब में उतरे ग्रामीण
कार्यक्रम का शुभारंभ गांव के पाहन लीलकू पाहन की अगुवाई में पारंपरिक विधि-विधान और पूजा-अर्चना के साथ हुआ। पूजा के पश्चात गांव के पुरुष, युवा और बुजुर्ग एकजुट होकर तालाब में उतरे। ग्रामीणों ने अपने पारंपरिक औजारों जैसे जाल और कुंबनी का उपयोग कर मछलियाँ पकड़ीं।
सामूहिकता का प्रतीक है यह रस्म
पूर्व मुखिया मोहन उरांव ने इस परंपरा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह रस्म केवल मछली पकड़ने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह हमारे समाज की एकता और सामूहिकता का प्रतीक है। पकड़ी गई मछलियों को बाद में पूरे गांव ने मिलकर पकाया और प्रसाद के रूप में ग्रहण किया। यह परंपरा आज के आधुनिक दौर में भी हमारी जड़ों को सुरक्षित रखे हुए है।
इनकी रही गरिमामयी उपस्थिति
इस पारंपरिक उत्सव में गांव के कई गणमान्य लोग और ग्रामीण शामिल हुए, जिनमें मुख्य रूप से:
- गणेश उरांव
- गंदरू उरांव
- जेना उरांव
- महली भगत
- दीपक कुजूर
- प्यारी उरांव
- अंकित उरांव
- पांचू उरांव
सांस्कृतिक विरासत: सरहुल प्रकृति की पूजा का पर्व है, और जल स्रोतों से जुड़ी यह परंपरा यह संदेश देती है कि जल और जीव जगत का संरक्षण हमारे जीवन का अभिन्न हिस्सा है।


