झारखंड की राजधानी रांची में आज मनरेगा के अस्तित्व और उसके अधिकार-आधारित स्वरूप को बचाने के लिए एक निर्णायक बैठक हुई। कांग्रेस के शीर्ष नेताओं और देश के प्रमुख सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने एक सुर में केंद्र सरकार के नए कानून ‘VB-GRAM G’ (विकसित भारत-जी राम जी) का विरोध करते हुए इसे मनरेगा को कमजोर करने वाली साजिश बताया।
प्रमुख रणनीतियां और घोषणाएं
बैठक में झारखंड कांग्रेस प्रभारी श्री के. राजू ने भविष्य की रणनीति साझा करते हुए तीन महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं:
- मनरेगा टास्क फोर्स: राज्य स्तर पर एक समर्पित टास्क फोर्स का गठन किया जाएगा।
- जिला कोऑर्डिनेटर: हर जिले में मनरेगा कोऑर्डिनेटर नियुक्त किए जाएंगे जो जमीनी स्तर पर शिकायतों का निपटारा करेंगे।
- विधायकों को टास्क: कांग्रेस के सभी विधायक अपने-अपने क्षेत्रों में ‘काम मांगो अभियान’ का मॉडल नेतृत्व करेंगे।
विशेषज्ञों की चिंता: क्यों हो रहा है VB-GRAM G का विरोध?
प्रख्यात अर्थशास्त्री प्रो. ज्यां द्रेज और मजदूर किसान शक्ति संगठन के निखिल डे ने तकनीकी और कानूनी पहलुओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि:
- अधिकारों में कटौती: नया कानून मनरेगा के “काम पाने के कानूनी अधिकार” को सरकार की इच्छा पर निर्भर योजना बना सकता है।
- कृषि सीजन में ‘नो-वर्क’ क्लॉज: खेती के समय काम बंद रखने के प्रावधान से गरीब मजदूरों की आय प्रभावित होगी।
- फंडिंग का बोझ: केंद्र द्वारा राज्यों पर 40% वित्तीय बोझ डालना संघीय ढांचे के खिलाफ है।
झारखंड में ‘काम मांगो अभियान’ की सफलता (आंकड़े)
ग्रामीण विकास मंत्री श्रीमती दीपिका पांडेय सिंह ने बैठक में हालिया अभियान के उत्साहजनक आंकड़े पेश किए:
| मुख्य बिंदु | आंकड़े (2-5 फरवरी 2026) |
| कुल प्रतिभागी | 1,74,245 |
| काम की मांग करने वाले | 1,03,158 |
| नए जॉब कार्ड जारी | 17,914 |
| महिला भागीदारी | 52% |
| कुल सृजित मानव-दिवस | 1017.65 लाख |
“मनरेगा केवल एक योजना नहीं, बल्कि ग्रामीण स्वाभिमान का प्रतीक है। हम ग्राम सभा की अनुमति के बिना जॉब कार्ड डिलीट करने और मस्टर रोल में देरी जैसी अनियमितताओं को बर्दाश्त नहीं करेंगे।”
— सामाजिक संगठनों का साझा बयान
निष्कर्ष
बैठक का समापन इस संकल्प के साथ हुआ कि कांग्रेस और सामाजिक संगठन मिलकर गांव-गांव जाकर मजदूरों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करेंगे। बैठक में संदीप दीक्षित, शिल्पी नेहा तिर्की, राजेश कच्छप और जेम्स हेरेंज जैसे दिग्गजों ने भी अपनी बात रखी।
