असम चुनाव 2026: कांग्रेस की ‘स्पेशल स्ट्रैटेजी’ तैयार, बंधू तिर्की को मिली सीनियर ऑब्जर्वर की बड़ी जिम्मेदारी

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नई दिल्ली/रांची: असम विधानसभा चुनाव 2026 में जीत का परचम लहराने के लिए कांग्रेस ने अभी से बिसात बिछानी शुरू कर दी है। इसी कड़ी में झारखंड कांग्रेस के कद्दावर नेता और कार्यकारी अध्यक्ष बंधु तिर्की को बड़ी भूमिका सौंपी गई है। संगठन ने उन्हें असम चुनाव के लिए सीनियर ऑब्जर्वर नियुक्त किया है, जिसके बाद उन्होंने दिल्ली में आलाकमान के साथ बैठकों का दौर शुरू कर दिया है।

के.सी. वेणुगोपाल के साथ अहम रणनीतिक बैठक

शनिवार को दिल्ली में कांग्रेस के संगठन महासचिव के.सी. वेणुगोपाल और बंधु तिर्की के बीच एक उच्च स्तरीय बैठक हुई। इस बैठक में असम की 126 विधानसभा सीटों के सामाजिक, राजनीतिक और भौगोलिक समीकरणों पर विस्तार से चर्चा की गई।

बंधु तिर्की ने बताया कि कांग्रेस इस बार पूरी तैयारी और ‘दमखम’ के साथ चुनावी मैदान में उतरेगी। उन्होंने कहा, “वेणुगोपाल जी ने चुनाव को लेकर कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं, जिन्हें धरातल पर उतारकर हम असम में नई ऊर्जा के साथ जनता को गोलबंद करेंगे।”

टी-ट्राइब्स और स्थानीय मुद्दों पर फोकस

कांग्रेस की इस बार की रणनीति का केंद्र बिंदु असम के टी-ट्राइब्स (चाय बागान श्रमिक) हैं। बंधु तिर्की ने स्पष्ट किया कि पार्टी इनके हक के लिए प्रमुखता से आवाज उठाएगी। रणनीति के मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:

  • ST का दर्जा: टी-ट्राइब्स को अनुसूचित जनजाति (ST) का दर्जा दिलाने की मांग को कांग्रेस अपना प्रमुख चुनावी मुद्दा बनाएगी।
  • जमीन का पट्टा: बरसों से रह रहे श्रमिकों को जमीन का मालिकाना हक (पट्टा) दिलाने के लिए ठोस नीति पेश की जाएगी।
  • ध्रुवीकरण के खिलाफ मोर्चा: बीजेपी द्वारा समाज को बांटने की कथित साजिश के खिलाफ कांग्रेस स्थानीय मुद्दों और एकजुटता के सहारे जनता का समर्थन मांगेगी।

दिग्गजों के साथ मंथन

अपनी दिल्ली यात्रा के दौरान बंधु तिर्की ने कांग्रेस के कई दिग्गज नेताओं के साथ बैठक कर असम की स्थिति पर फीडबैक साझा किया। इनमें शामिल थे:

  • डी.के. शिवकुमार: कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री
  • सचिन पायलट: वरिष्ठ नेता और पूर्व उपमुख्यमंत्री, राजस्थान
  • गौरव गोगोई: असम पीसीसी और सांसद
  • प्रकाश जोशी: पश्चिम बंगाल के सीनियर ऑब्जर्वर

झारखंड के अनुभव का मिलेगा लाभ

बंधु तिर्की को झारखंड में आदिवासियों और पिछड़ों के बीच काम करने का लंबा अनुभव है। कांग्रेस नेतृत्व को उम्मीद है कि असम के चाय बागानों में रहने वाले आदिवासी समुदायों के बीच तिर्की की सक्रियता पार्टी के लिए ‘गेम चेंजर’ साबित हो सकती है।

असम में 2026 की चुनावी जंग अब दिलचस्प होने वाली है, क्योंकि कांग्रेस ने क्षेत्रीय भावनाओं और जनजातीय अधिकारों को अपनी रणनीति की धुरी बना लिया है।

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