बोकारो: गोमिया में हाथियों का खूनी तांडव, दो महिलाओं समेत तीन को कुचला; ग्रामीणों का ‘त्राहिमाम आंदोलन’ का एलान

Hamar Jharkhand News
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गोमिया (बोकारो): झारखंड के बोकारो जिले अंतर्गत गोमिया प्रखंड के बड़की पुन्नी क्षेत्र में हाथियों के एक झुंड ने आज सुबह जमकर तबाही मचाई। अपने कॉरिडोर से भटके पांच हाथियों के इस झुंड ने दो महिलाओं समेत तीन ग्रामीणों को बेरहमी से पटक-पटक कर मौत के घाट उतार दिया, जबकि एक अन्य महिला गंभीर रूप से घायल है। इस घटना के बाद पूरे इलाके में दहशत का माहौल है और आक्रोशित ग्रामीणों ने वन विभाग के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए सड़क जाम कर दिया है।

तड़के सुबह हुआ हमला, घरों में घुसकर मारा

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, हाथियों का झुंड अचानक बड़की पुन्नी गांव में आ धमका। डर के मारे लोग अपने घरों में दुबक गए थे, लेकिन हाथियों ने कच्चे मकानों को ध्वस्त करना शुरू कर दिया। जब लोग जान बचाने के लिए बाहर भागे, तो हाथियों ने उन्हें अपनी चपेट में ले लिया।

मृतकों की पहचान:

  1. भगिया देवी (50 वर्ष)
  2. कमली देवी (55 वर्ष)
  3. गंगा करमाली (60 वर्ष)

इस हमले में एक अन्य महिला गंभीर रूप से घायल हुई है, जिसका उपचार अस्पताल में चल रहा है।

दहशत में रातें, छतों पर ‘रतजगा’ करने को मजबूर ग्रामीण

ग्रामीणों का कहना है कि वे लंबे समय से खौफ के साये में जी रहे हैं। शाम ढलते ही लोग हाथियों के डर से घरों में कैद हो जाते हैं या फिर पक्के मकानों की छतों पर रात गुजारने को मजबूर हैं। दिन के उजाले में भी लोग अकेले बाहर निकलने से कतरा रहे हैं। वन विभाग द्वारा गठित ‘हाथी भगाओ टीम’ अब तक पूरी तरह विफल साबित हुई है।

विकास की भेंट चढ़े कॉरिडोर, भटके गजराज

विशेषज्ञों और स्थानीय लोगों का मानना है कि विकास योजनाओं के नाम पर हाथियों के प्राकृतिक गलियारों (कॉरिडोर) के साथ हुई छेड़छाड़ इस संकट की मुख्य वजह है। रहने की जगह और भोजन की तलाश में हाथी अब आबादी वाले क्षेत्रों में घुस रहे हैं। सरकारी आंकड़ों की मानें तो अकेले बोकारो जिले में इस वर्ष अब तक 8 लोग हाथियों का शिकार बन चुके हैं। पड़ोसी जिले रामगढ़ में भी स्थिति भयावह है।

“सिर्फ मुआवजे से काम नहीं चलेगा”: भाकपा नेता

हाल ही में ग्रामीणों के प्रतिनिधिमंडल के साथ वन अधिकारियों से मिलने वाले भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) के नेता मोहम्मद इफ्तेखार ने इस घटना पर कड़ा रोष व्यक्त किया है। उन्होंने कहा:

“सरकार केवल मुआवजा बांटकर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला नहीं झाड़ सकती। वन विभाग हाथियों पर नियंत्रण पाने में पूरी तरह विफल रहा है। अब पानी सिर से ऊपर जा चुका है। अगर जल्द ही ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो ग्रामीण अपनी जान-माल की रक्षा के लिए ‘त्राहिमाम आंदोलन’ शुरू करेंगे।”

सड़क जाम और प्रदर्शन

घटना के बाद उत्तेजित ग्रामीणों ने शवों के साथ सड़क जाम कर दिया है और वन विभाग के कर्मियों का घेराव किया है। ग्रामीणों की मांग है कि उन्हें हाथियों के आतंक से स्थायी मुक्ति दिलाई जाए, न कि केवल कागजी आश्वासन मिले। समाचार लिखे जाने तक इलाके में भारी तनाव व्याप्त है और प्रशासन ग्रामीणों को समझाने का प्रयास कर रहा है।

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