राजधानी के हरमू हाउसिंग कॉलोनी में मंडरा रहा खतरा: जर्जर ‘जनता फ्लैट’ बने हादसों और अपराधियों का गढ़

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"हादसे को दावत देता हरमू का जर्जर जनता फ्लैट: ६ साल से खाली पड़ी यह इमारत अब अपराधियों और नशेड़ियों का अड्डा बन चुकी है।"

राँची: राजधानी के हृदय स्थली कहे जाने वाले हरमू हाउसिंग कॉलोनी में स्थित जनता फ्लैट संख्या 11 और 12 इन दिनों स्थानीय निवासियों के लिए खौफ का सबब बन गए हैं। वर्षों से जर्जर हालत में पड़े ये फ्लैट न केवल किसी बड़ी नागरिक त्रासदी को आमंत्रण दे रहे हैं, बल्कि अब यह इलाका असामाजिक तत्वों और अपराधियों की सुरक्षित पनाहगाह में तब्दील हो चुका है।

खंडहर होती इमारत, जड़ों में जकड़ा अस्तित्व

इन फ्लैटों की स्थिति इतनी भयावह है कि भवन की छतों पर विशाल पीपल के पेड़ उग आए हैं। इन पेड़ों की गहरी जड़ों ने पूरी इमारत की संरचना (Structure) को हिला कर रख दिया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि इमारत कभी भी ताश के पत्तों की तरह ढह सकती है, जिससे आसपास रहने वाले परिवारों पर भी खतरा मंडरा रहा है।

6 साल पहले खाली, पर अब तक नहीं हुआ ध्वस्तीकरण

गौरतलब है कि झारखंड आवास बोर्ड ने करीब 6 वर्ष पूर्व ही इन फ्लैटों को असुरक्षित घोषित कर खाली करवा लिया था। लेकिन हैरानी की बात यह है कि इन्हें आज तक ध्वस्त नहीं किया गया। प्रशासन की इसी सुस्ती का फायदा चोरों और नशेड़ियों ने उठाया है।

  • इमारत के दरवाजे, खिड़कियां, लोहे के ग्रिल और पानी के पाइप तक चोरी हो चुके हैं।
  • खाली पड़े कमरों का उपयोग अब दिन-रात नशे के अड्डों के रूप में हो रहा है।

शाम ढलते ही पसरता है सन्नाटा, बढ़ता है अपराध

स्थानीय निवासियों का आरोप है कि शाम होते ही यहाँ अपराधियों का जमावड़ा लग जाता है। राहगीरों के साथ लूटपाट और छीना-झपटी यहाँ आम बात हो गई है। महिलाओं और बच्चियों का घर से निकलना दूभर हो गया है।

निवासियों का दर्द: “हमने कई बार अरगोड़ा थाना में शिकायत की। पुलिस आती भी है, लेकिन अपराधी पीछे के रास्ते से भाग निकलते हैं। पकड़े जाने पर भी कड़ी कार्रवाई न होने से उनके हौसले बुलंद हैं।”

प्रशासन और सरकार से गुहार

कॉलोनी के त्रस्त नागरिकों ने अब इस गंभीर मुद्दे को मुख्यमंत्री, प्रशासन और झारखंड राज्य आवास बोर्ड के समक्ष ले जाने का निर्णय लिया है। उनकी मांग स्पष्ट है:

  1. इन जर्जर और खतरनाक फ्लैटों को तत्काल ध्वस्त (Demolish) किया जाए।
  2. इलाके में पुलिस गश्त बढ़ाई जाए ताकि असामाजिक तत्वों पर अंकुश लग सके।

यदि समय रहते इस दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो यह सरकारी लापरवाही किसी दिन बड़ी जनहानि या बड़ी आपराधिक घटना का कारण बन सकती है।

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