रांची: झारखंड को गंभीर बीमारी फाइलेरिया (हाथीपांव) से मुक्ति दिलाने की दिशा में स्वास्थ्य विभाग ने एक बड़ा कदम उठाया है। गुरुवार को रांची के नामकुम स्थित आईपीएच (IPH) सभागार में आयोजित राज्य स्तरीय कार्यक्रम में स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफ़ान अंसारी ने खुद फाइलेरिया रोधी दवा खाकर ‘मास ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन’ (MDA) अभियान की शुरुआत की।
इस अवसर पर उन्होंने 14 जिलों के लिए प्रचार वाहनों (जागरूकता रथों) को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया, जो गांव-गांव जाकर लोगों को इस बीमारी के प्रति जागरूक करेंगे।
2029 तक फाइलेरिया मुक्त झारखंड का लक्ष्य
डॉ. इरफ़ान अंसारी ने अपने संबोधन में कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य वर्ष 2029 तक झारखंड को पूरी तरह फाइलेरिया मुक्त बनाना है। उन्होंने बताया कि:
- खूंटी जिला पहले ही फाइलेरिया मुक्त बनने में सफलता पा चुका है।
- अगस्त 2025 में 9 जिलों में अभियान चलाया गया था।
- अब 10 फ़रवरी से 26 फ़रवरी 2026 तक राज्य के 14 चिन्हित जिलों में महाभियान चलेगा।
अभियान की मुख्य बातें और कार्ययोजना
मंत्री ने स्पष्ट किया कि 10 फ़रवरी को बूथों पर दवा दी जाएगी, जबकि 11 से 26 फ़रवरी तक स्वास्थ्यकर्मी घर-घर जाकर दवा खिलाएंगे।
| विवरण | जानकारी |
| अभियान की तिथि | 10 फ़रवरी से 26 फ़रवरी 2026 |
| लक्षित जिले | रांची, गुमला, गिरिडीह, बोकारो, साहिबगंज, पाकुड़, देवघर, पूर्वी सिंहभूम, कोडरमा, रामगढ़, सिमडेगा, धनबाद, लोहरदगा और गढ़वा। |
| रणनीति | बूथ कवरेज के बाद 15 दिनों तक घर-घर दस्तक। |
| नई पहल | अब जन वितरण प्रणाली (PDS) दुकानों से भी दवा उपलब्ध कराने के निर्देश। |
“कोई भी अभियान छोटा नहीं होता। फाइलेरिया की दवा पूरी तरह सुरक्षित है। यदि आपके शरीर में इसके जीवाणु हैं, तो दवा लेने से वे मर जाएंगे और आप अपंगता से बच सकेंगे।” > — डॉ. इरफ़ान अंसारी, स्वास्थ्य मंत्री
स्वास्थ्य क्षेत्र में अन्य बड़े सुधार
मंत्री ने राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था को देश के अग्रणी राज्यों की श्रेणी में लाने का भरोसा दिलाया। उन्होंने कई महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं:
- मेडिकल कॉलेज: राज्य के सभी जिलों में मेडिकल कॉलेज खोलने का प्रयास जारी है।
- रिम्स-2 और किडनी अस्पताल: रांची में रिम्स-2 पर काम चल रहा है और जल्द ही किडनी ट्रांसप्लांट अस्पताल की सुविधा शुरू होगी।
जनभागीदारी है जरूरी
अभियान निदेशक श्री शशि प्रकाश झा ने पोलियो मुक्ति की तर्ज पर फाइलेरिया को खत्म करने का आह्वान किया। स्टेट को-ऑर्डिनेटर श्रीमती शाज्ञा सिंह ने बताया कि फाइलेरिया के कीड़े एक साथ मारने के लिए पूरी आबादी का एक साथ दवा खाना अनिवार्य है।
कार्यक्रम में स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, एएनएम, सहिया, सीएचओ और विभिन्न जिलों से आए मुखिया व जिला परिषद सदस्य उपस्थित थे। सभी ने एक स्वर में झारखंड को ‘हाथीपांव’ मुक्त बनाने का संकल्प लिया।
