मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम का जन्मोत्सव ‘रामनवमी’ इस साल 27 मार्च को बेहद खास संयोगों के साथ मनाया जाएगा। इस अवसर पर पूरे शहर और मंदिरों में विशेष धार्मिक आयोजनों की तैयारियां जोरों पर हैं। राम भक्तों के लिए इस बार सबसे उत्साहजनक बात यह है कि मुख्य पर्व से पहले शहर में तीन भव्य मंगलवारी जुलूस निकाले जाएंगे, जो भक्ति के माहौल को चरम पर ले जाएंगे।
तीन मंगलवारी जुलूसों की तिथियां
परंपरा के अनुसार, रामनवमी से पहले हर मंगलवार को मंगलवारी जुलूस निकालने की प्रथा है। इस वर्ष की महत्वपूर्ण तिथियां इस प्रकार हैं:
- पहला मंगलवारी जुलूस: 10 मार्च
- दूसरा मंगलवारी जुलूस: 17 मार्च (आज)
- तीसरा मंगलवारी जुलूस: 24 मार्च
इन जुलूसों में ढोल-नगाड़ों, पारम्परिक झंडों और प्रभु राम के जयकारों के साथ श्रद्धालु सड़कों पर उतरेंगे। जगह-जगह झांकियां और सेवा शिविरों का भी आयोजन किया जाएगा।
महाअष्टमी और नवमी का विशेष संयोग
पर्व की भव्यता 26 मार्च से और बढ़ जाएगी। इस दिन महाअष्टमी की भव्य झांकी निकाली जाएगी और मंदिरों को विशेष लाइटों व फूलों से सजाया जाएगा।
रामनवमी की तिथि और शुभ मुहूर्त: पंडित कौशल कुमार मिश्र ने वाराणसी पंचांग के हवाले से बताया कि इस बार नवमी तिथि का विशेष गणित बैठ रहा है:
- तिथि प्रारंभ: 27 मार्च, सुबह 5:56 बजे से
- तिथि समाप्ति: 27 मार्च, शाम 5:12 बजे तक
- मध्याह्न काल (जन्म समय): दोपहर 12:02 बजे तक नवमी तिथि रहेगी, जो पूजा-अर्चना के लिए सबसे श्रेष्ठ समय है।
पुनर्वसु नक्षत्र का खास महत्व
इस साल रामनवमी पर पुनर्वसु नक्षत्र का भी अद्भुत संयोग बन रहा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान राम का जन्म भी इसी नक्षत्र में हुआ था।
“जब नवमी तिथि और पुनर्वसु नक्षत्र का मिलन होता है, तो वह समय आध्यात्मिक सिद्धियों और पूजा के लिए अत्यंत फलदायी हो जाता है। यही कारण है कि इस बार मंदिरों में हवन और अनुष्ठान का महत्व और बढ़ गया है।” — पंडित कौशल कुमार मिश्र
श्रद्धालु सुबह से ही मंदिरों में पहुंचकर दर्शन-पूजन करेंगे और दोपहर के समय विशेष जन्मोत्सव आरती का आनंद लेंगे।


