रांची में अब मुमकिन होगा किडनी ट्रांसप्लांट: रिम्स और राज हॉस्पिटल को मिली मंजूरी, बाहर जाने की मजबूरी होगी खत्म

Hamar Jharkhand News
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रांची | न्यूज़ डेस्क झारखंड के किडनी मरीजों के लिए एक बड़ी खुशखबरी है। अब गंभीर किडनी रोगों के इलाज और प्रत्यारोपण (Transplant) के लिए मरीजों को वेल्लोर, दिल्ली या अन्य राज्यों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। राजधानी रांची के रिम्स (RIMS) और राज हॉस्पिटल में जल्द ही किडनी ट्रांसप्लांट की सुविधा शुरू होने जा रही है।

समिति की बैठक में लिया गया बड़ा फैसला

स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह की अध्यक्षता में आयोजित ‘मानव अंग प्रत्यारोपण अधिनियम’ की बैठक में यह महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया। बैठक में सर्वसम्मति से रिम्स और राज हॉस्पिटल को किडनी ट्रांसप्लांट का लाइसेंस देने पर सहमति बनी। विभाग ने स्पष्ट किया है कि लाइसेंस की औपचारिकताएं जल्द पूरी कर ली जाएंगी।

राज्य में ही होगा गंभीर बीमारियों का इलाज

अपर मुख्य सचिव ने निर्देश दिया है कि मुख्यमंत्री गंभीर बीमारी उपचार योजना के तहत मरीजों को राज्य के भीतर ही विश्वस्तरीय चिकित्सा सुविधा दी जाए। उन्होंने कहा:

“हमारी प्राथमिकता ऐसी व्यवस्था विकसित करना है जिससे मरीजों को इलाज के लिए राज्य से बाहर न जाना पड़े। इसके लिए अतिरिक्त इंफ्रास्ट्रक्चर और विशेष पैकेज पर काम किया जा रहा है।”

खबर के मुख्य बिंदु (Key Highlights):

  • 15 जनवरी को अगली बड़ी बैठक: राज्य के 10 अन्य चिकित्सा महाविद्यालयों में लिवर और हार्ट ट्रांसप्लांट की संभावनाओं पर चर्चा होगी।
  • योजनाओं का एकीकरण: आयुष्मान भारत और मुख्यमंत्री अबुआ स्वास्थ्य सुरक्षा योजना के दायरे में आने वाले मरीजों का इलाज अब अनिवार्य रूप से राज्य में ही सुनिश्चित किया जाएगा।
  • विशेष परिस्थिति में ही बाहर जाने की अनुमति: यदि कोई मरीज उक्त योजनाओं के दायरे में नहीं आता है, तभी उसे राज्य से बाहर इलाज के लिए अनुमति दी जाएगी।

बैठक में ये रहे मौजूद

इस उच्चस्तरीय बैठक में अपर सचिव विद्यानंद शर्मा पंकज, रिटायर्ड जज शिवनारायण सिंह, स्वास्थ्य सेवाओं के निदेशक डॉ. सिद्धार्थ सान्याल, रिम्स नेफ्रोलॉजी की विभागाध्यक्ष डॉ. प्रज्ञा घोष पंत, और कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. प्रकाश सहित कई अधिकारी और एनजीओ प्रतिनिधि उपस्थित थे।

निष्कर्ष: झारखंड सरकार का यह कदम राज्य की स्वास्थ्य प्रणाली में मील का पत्थर साबित होगा। इससे न केवल मरीजों का पैसा बचेगा, बल्कि समय पर इलाज मिलने से कई जिंदगियां भी बचाई जा सकेंगी।

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