शिकारीपाड़ा: 15 गांवों के ग्रामीणों ने फूंका बिगुल, कहा— “कोयला कंपनियों को नहीं देंगे एक इंच जमीन”

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शिकारीपाड़ा (दुमका): क्षेत्र में कोयला उत्खनन और टेस्टिंग बोरिंग को लेकर ग्रामीणों और प्रशासन के बीच टकराव की स्थिति गहराती जा रही है। आज बादलपाड़ा में बादलपाड़ा, कल्याणपुर, खड़ीजोल और बाकीजोर समेत करीब 15 गांवों के ग्रामीण और ग्राम प्रधान अपनी पारंपरिक वेशभूषा में एकजुट हुए।

प्रशासन की गैर-मौजूदगी से भड़के ग्रामीण

ग्रामीणों का कहना है कि वे शिकारीपाड़ा अंचल कार्यालय द्वारा दिए गए नोटिस के आधार पर ग्राम सभा के लिए एकत्रित हुए थे। उम्मीद थी कि प्रशासनिक अधिकारी वहां पहुंचकर कोल कंपनियों द्वारा की जा रही बोरिंग पर ग्रामीणों की सहमति और पक्ष जानेंगे।

  • इंतजार: दोपहर से शाम तक ग्रामीण अधिकारियों की राह देखते रहे।
  • नतीजा: किसी भी प्रशासनिक अधिकारी के न पहुंचने पर ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा।
  • ऐलान: ग्रामीणों ने दोटूक शब्दों में कहा कि अब क्षेत्र में किसी भी कंपनी को टेस्टिंग बोरिंग या कोयला उत्खनन का कार्य नहीं करने दिया जाएगा।

बिना ग्राम सभा के कार्य का विरोध

कुछ दिन पूर्व ही ग्रामीणों ने भारी संख्या में शिकारीपाड़ा अंचल कार्यालय पहुंचकर अंचलाधिकारी (CO) कपिल देव ठाकुर को ज्ञापन सौंपा था। ग्रामीणों का मुख्य आरोप है कि कंपनियां बिना ग्राम सभा की अनुमति के अवैध रूप से बोरिंग कर रही हैं।

“अंचलाधिकारी ने पहले आश्वासन दिया था कि उच्च अधिकारियों को सूचित किया जाएगा और ग्राम सभा की सहमति के बिना काम नहीं होगा। हालांकि, प्रशासन कुछ ग्रामीणों की सहमति का दावा कर रहा है, जिसे बहुमत की आवाज दबाने की कोशिश माना जा रहा है।”

निष्कर्ष: कंपनियों की राह हुई मुश्किल

ग्रामीणों की एकजुटता और कड़े रुख को देखते हुए यह साफ है कि आने वाले दिनों में शिकारीपाड़ा अंचल में कोयला कंपनियों के लिए परिचालन शुरू करना एक बड़ी चुनौती होगी। जल, जंगल और जमीन की रक्षा के लिए ग्रामीण अब किसी भी समझौते के मूड में नहीं दिख रहे हैं।

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