खूंटी/रांची: पड़हा राजा सोमा मुंडा की जघन्य हत्या के विरोध में और मुख्य साजिशकर्ताओं की गिरफ्तारी की मांग को लेकर विभिन्न आदिवासी संगठनों ने आज, 17 जनवरी को ‘झारखंड बंद’ का आह्वान किया है। इस बंद को राज्यभर के दर्जनों सामाजिक और राजनीतिक संगठनों का समर्थन प्राप्त है।
क्यों बुलाया गया है बंद?
7 जनवरी को खूंटी के एदेल संगा पड़हा राजा सोमा मुंडा की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। हालांकि, पुलिस ने इस मामले में अब तक 7 लोगों को गिरफ्तार किया है, लेकिन आंदोलनकारी संगठनों का आरोप है कि हत्याकांड का मुख्य शूटर और असली साजिशकर्ता अभी भी पुलिस की गिरफ्त से बाहर है। संगठनों की मांग है कि:
- मुख्य अपराधियों को अविलंब गिरफ्तार किया जाए।
- पीड़ित परिवार को उचित मुआवजा और सुरक्षा प्रदान की जाए।
- मामले की त्वरित सुनवाई कर दोषियों को कड़ी सजा दी जाए।
शांतिपूर्ण बंद और आवश्यक सेवाओं को छूट
आदिवासी समन्वय समिति और अन्य संगठनों ने स्पष्ट किया है कि यह बंद पूर्णतः शांतिपूर्ण रहेगा। आम जनजीवन को ध्यान में रखते हुए कुछ महत्वपूर्ण सेवाओं को बंद से मुक्त रखा गया है:
- स्कूल बसें और एंबुलेंस
- अस्पताल और दवा दुकानें
- आपातकालीन सेवाएं
मशाल जुलूस से एकजुटता का प्रदर्शन
बंद की पूर्व संध्या पर (16 जनवरी) खूंटी, रांची और सरायकेला के कुचाई सहित राज्य के कई हिस्सों में मशाल जुलूस निकाला गया। कुचाई में ‘आदिवासी एकता मंच’ के बैनर तले युवाओं और समाज के प्रबुद्ध लोगों ने सड़क पर उतरकर सोमा मुंडा के लिए न्याय की मांग की। वक्ताओं ने कहा कि सोमा मुंडा ने जीवनभर जल, जंगल और जमीन की रक्षा के लिए संघर्ष किया, उनकी हत्या समाज की व्यवस्था पर बड़ा आघात है।
प्रशासन अलर्ट पर
मामले की गंभीरता को देखते हुए आईजी मनोज कौशिक ने पहले ही एसआईटी (SIT) का गठन कर जांच तेज करने के निर्देश दिए हैं। खूंटी सदर थाना प्रभारी को निलंबित कर नई जिम्मेदारी सौंपी गई है। आज के बंद को देखते हुए रांची और खूंटी सहित संवेदनशील इलाकों में भारी पुलिस बल की तैनाती की गई है ताकि सुरक्षा व्यवस्था बनी रहे।
इन संगठनों का मिला समर्थन
इस बंद को आदिवासी समन्वय समिति, आदिवासी बचाओ मोर्चा, मानकी मुंडा संघ, केंद्रीय सरना समिति, झारखंड पार्टी, और ऑल मुस्लिम यूथ एसोसिएशन (AMYA) समेत करीब 25 से अधिक संगठनों ने अपना समर्थन दिया है।


