रांची में ‘परंपरा प्रदर्शनी’ और ‘अपनों की उड़ान’ का भव्य शंखनाद: मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने की मारवाड़ी समाज और ग्रामीण महिलाओं के हुनर की सराहना

रांची स्थित मारवाड़ी भवन में आयोजित 'परंपरा प्रदर्शनी' सह 'अपनों की उड़ान' कार्यक्रम के प्री-लॉन्च समारोह में उपस्थित मारवाड़ी सहायक समिति की महिला विंग की सदस्याएं व अन्य गणमान्य।

रांची। राजधानी रांची के ऐतिहासिक मारवाड़ी भवन में मारवाड़ी सहायक समिति द्वारा आयोजित ‘परंपरा प्रदर्शनी’ के प्री-लॉन्च समारोह सह “अपनों की उड़ान” कार्यक्रम का भव्य और गरिमामय आयोजन किया गया। इस विशेष समारोह में झारखंड की ग्रामीण विकास, ग्रामीण कार्य एवं पंचायती राज मंत्री माननीय दीपिका पांडेय सिंह मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुईं। कार्यक्रम का माहौल बेहद उत्साहजनक और सकारात्मक था, जहाँ एक ओर मारवाड़ी समाज के गौरवशाली इतिहास की झलक दिखी, वहीं दूसरी ओर महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण और उद्यमिता को लेकर एक नई सोच और विज़न सामने आया।

Contents
महिला सशक्तिकरण का नया दौर: हर क्षेत्र में लहरा रहा प्रतिभा का परचमव्यापार और मारवाड़ी समाज: परिश्रम और दूरदृष्टि का बेजोड़ आदर्शजेएसएलपीएस (JSLPS) की सफलता की कहानी: झारखंड की दीदियों ने दुबई से लंदन तक गाड़े झंडे1. बिरसा हरित ग्राम योजना और आम बागवानी2. वैश्विक बाजारों में झारखंड के उत्पादों की गूंजग्रामीण महिलाओं के लिए बाजार की चुनौती और सरकार का संकल्पमारवाड़ी सहायक समिति के 115 वर्षों के गौरवशाली इतिहास को नमनग्रामीण उद्यमिता और वैल्यू एडिशन (मूल्य संवर्धन) पर विशेष बलकोल्ड स्टोरेज और वेयरहाउसिंग की आवश्यकताझारखंड के सिल्क (रेशम) उद्योग का आधुनिकीकरणगरिमामयी उपस्थिति और सामूहिक संकल्पनिष्कर्ष: ‘अपनों की उड़ान’ से आत्मनिर्भरता का नया आसमान

समारोह को संबोधित करते हुए मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने महिलाओं की बदलती भूमिका, ग्रामीण अर्थव्यवस्था के सुदृढ़ीकरण और व्यापार जगत में मारवाड़ी समाज के ऐतिहासिक योगदान पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम की आधिकारिक शुरुआत की और समिति की महिला विंग द्वारा लगाए गए विभिन्न स्टॉलों और प्रदर्शनी का अवलोकन कर उनका उत्साहवर्धन किया।

महिला सशक्तिकरण का नया दौर: हर क्षेत्र में लहरा रहा प्रतिभा का परचम

अपने ओजस्वी संबोधन में मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने कहा कि समकालीन भारत में महिलाएँ अब किसी भी क्षेत्र में पीछे नहीं हैं। वे केवल गृहस्थी तक सीमित न रहकर शिक्षा, स्वास्थ्य, आधुनिक नवाचार (Innovation) और उद्यमिता (Entrepreneurship) सहित हर क्षेत्र में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा रही हैं।

मंत्री का मुख्य संदेश: “आज समाज और देश के विकास में महिलाओं की भूमिका लगातार सशक्त और निर्णायक हो रही है। कोई भी समाज या राष्ट्र तब तक पूर्ण रूप से प्रगति नहीं कर सकता, जब तक उसकी आधी आबादी आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर और निर्णय लेने में सक्षम न हो।”

उन्होंने मारवाड़ी सहायक समिति से जुड़ी महिलाओं के प्रयासों की मुक्तकंठ से सराहना करते हुए कहा कि “अपनों की उड़ान” जैसे प्रेरणादायी कार्यक्रम महिलाओं को अपनी पारंपरिक सीमाओं से बाहर निकलने, नए व्यावसायिक अवसरों को अपनाने तथा अपने सपनों को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाने का हौसला दे रहे हैं। यह आयोजन इस बात का प्रत्यक्ष प्रमाण है कि जब महिलाओं को सही मंच और अवसर मिलता है, तो वे अपनी एक स्वतंत्र और मजबूत पहचान बनाने में पूरी तरह सक्षम हैं।

व्यापार और मारवाड़ी समाज: परिश्रम और दूरदृष्टि का बेजोड़ आदर्श

उद्योग और व्यापार के क्षेत्र का उल्लेख करते हुए ग्रामीण विकास मंत्री ने कहा कि जब भी भारत या झारखंड में उद्योग, व्यापार और उद्यमिता की बात होगी, तो मारवाड़ी समाज का नाम सबसे पहले और अनिवार्य रूप से लिया जाएगा। इसके बिना व्यापारिक इतिहास की कल्पना ही असंभव है।

उन्होंने कहा कि इस समाज ने अपने अद्वितीय परिश्रम, गहरी दूरदृष्टि, अद्भुत व्यापारिक समझ और निरंतर सामाजिक योगदान के माध्यम से स्वयं को पूरे देश के सामने एक आदर्श के रूप में स्थापित किया है। मारवाड़ी समाज ने न केवल देश की अर्थव्यवस्था को गति दी है, बल्कि संकट के समय में हमेशा सामाजिक सरोकारों और जनकल्याण के कार्यों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया है।

जेएसएलपीएस (JSLPS) की सफलता की कहानी: झारखंड की दीदियों ने दुबई से लंदन तक गाड़े झंडे

झारखंड सरकार के प्रयासों और ग्रामीण महिलाओं की सफलता का एक अत्यंत गौरवशाली आंकड़ा साझा करते हुए मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने बताया कि आज झारखंड में जेएसएलपीएस (Jharkhand State Livelihood Promotion Society) से जुड़कर 32 लाख से अधिक ग्रामीण महिलाएँ अपनी स्वतंत्र भागीदारी, विशिष्ट पहचान और अभूतपूर्व सफलता के साथ एक नया इतिहास रच रही हैं। ग्रामीण क्षेत्रों की ये दीदियाँ आज स्वयं सहायता समूहों (SHGs) के माध्यम से न केवल आत्मनिर्भर बन रही हैं, बल्कि अपने परिवारों की आर्थिक रीढ़ भी बन चुकी हैं।

इस सफलता को रेखांकित करने के लिए उन्होंने निम्नलिखित प्रमुख उदाहरण प्रस्तुत किए:

1. बिरसा हरित ग्राम योजना और आम बागवानी

राज्य सरकार की इस महत्वाकांक्षी योजना के अंतर्गत की जा रही आम की बागवानी ग्रामीण महिलाओं के लिए बेहद सफल और गेम-चेंजर साबित हुई है। झारखंड के सुदूर गांवों में महिलाओं द्वारा उपजाए गए जैविक और उच्च गुणवत्ता वाले आम आज न केवल स्थानीय स्तर पर, बल्कि देश-विदेश के बड़े बाजारों में अपनी खास पहचान बना रहे हैं।

2. वैश्विक बाजारों में झारखंड के उत्पादों की गूंज

झारखंड की ग्रामीण महिलाओं द्वारा तैयार किए गए हस्तशिल्प, कृषि उत्पाद और पारंपरिक सामग्रियां अब अंतरराष्ट्रीय बाजारों (International Markets) तक पहुँच रही हैं। मंत्री ने गर्व के साथ साझा किया कि:

  • पिछले वर्ष (2025): झारखंड की दीदियों के उत्पाद दुबई के बाजारों तक पहुँचे और वहां उन्हें बेहद सराहना मिली।
  • इस वर्ष (2026): इन उत्पादों ने अपनी पहुँच का विस्तार करते हुए लंदन (यूनाइटेड किंगडम) के बाजारों तक अपनी मजबूत पहचान बना ली है। यह राज्य के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि है।

ग्रामीण महिलाओं के लिए बाजार की चुनौती और सरकार का संकल्प

मंत्री ने बहुत ही व्यावहारिक दृष्टिकोण रखते हुए कहा कि ग्रामीण परिवेश से आने वाली महिलाओं और महिला उद्यमियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती हमेशा से ‘बाजार तक पहुँच’ (Market Access) और ‘विपणन’ (Marketing) की रही है। सुदूर गांवों में बेहतरीन उत्पाद तैयार होने के बावजूद, सही बाजार और उचित मूल्य न मिल पाने के कारण उनका उचित विकास नहीं हो पाता था।

इसी समस्या को ध्यान में रखते हुए ग्रामीण विकास विभाग द्वारा ग्रामीण महिलाओं को सीधे बड़े बाजारों और कॉरपोरेट सेक्टर से जोड़ने की दिशा में लगातार ठोस नीतिगत कार्य किए जा रहे हैं।

चुनौतीसरकार और समाज का समाधान (रोडमैप)
सीमित स्थानीय बाजारजेएसएलपीएस और पलाश ब्रांड के माध्यम से राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर उत्पादों की ब्रांडिंग।
बिचौलियों द्वारा शोषणडिजिटल प्लेटफॉर्म्स और सीधे खरीदारों (B2B) से दीदियों को जोड़ना।
मंच की कमीमारवाड़ी समाज जैसे स्थापित व्यापारिक संगठनों के सहयोग से ग्रामीण महिलाओं को व्यावसायिक मंच उपलब्ध कराना।

उन्होंने मारवाड़ी समाज के प्रबुद्ध व्यवसायियों से अपील की कि जिस प्रकार उन्होंने व्यापार के क्षेत्र में अपनी मजबूत और अमिट पहचान बनाई है, उसी प्रकार वे झारखंड की इन ग्रामीण महिलाओं को भी एक ऐसा हैंडहोल्डिंग सपोर्ट और मंच उपलब्ध कराएं, जिससे ये महिलाएँ भविष्य में स्वयं बड़ी उद्यमी (Entrepreneurs) बन सकें और ग्रामीण क्षेत्रों में अनेक लोगों को रोजगार उपलब्ध कराने का माध्यम बनें।

मारवाड़ी सहायक समिति के 115 वर्षों के गौरवशाली इतिहास को नमन

समारोह के दौरान मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने मारवाड़ी सहायक समिति के 115 वर्षों के लंबे और अत्यंत गौरवशाली इतिहास की दिल से सराहना की। उन्होंने कहा कि किसी भी सामाजिक संस्था या संगठन का सवा सौ साल के करीब तक पूरी सक्रियता, समर्पण और निष्ठा के साथ समाज सेवा, स्वास्थ्य, शिक्षा और जनहित के कार्यों में निरंतर बने रहना अपने आप में एक अद्भुत और असाधारण उपलब्धि है। पीढ़ी दर पीढ़ी इस सेवा भावना को जीवित रखना समिति के मजबूत सिद्धांतों को दर्शाता है। उन्होंने समिति के सभी वर्तमान व पूर्व पदाधिकारियों एवं सदस्यों को उनके इस ऐतिहासिक और निरंतर योगदान के लिए बधाई व शुभकामनाएं दीं।

ग्रामीण उद्यमिता और वैल्यू एडिशन (मूल्य संवर्धन) पर विशेष बल

अपने संबोधन के उत्तरार्ध में मंत्री ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था के भविष्य को लेकर एक बेहद महत्वपूर्ण और तकनीकी विज़न सामने रखा। उन्होंने कहा कि आज के दौर में केवल पारंपरिक कृषि पर निर्भर रहकर आजीविका चलाना और आर्थिक रूप से समृद्ध होना कठिन होता जा रहा है। इसलिए अब ग्रामीण क्षेत्रों को सीधे ‘उद्यमिता’ (Entrepreneurship) से जोड़ना बेहद आवश्यक है।

इसके लिए उन्होंने निम्नलिखित तीन बिंदुओं पर विशेष ध्यान देने की बात कही:

  • कृषि का व्यवसायीकरण: खेती को सिर्फ जीवनयापन का साधन न मानकर एक व्यवसाय (Business) के रूप में विकसित करना होगा।
  • कृषि आधारित उद्योग: ग्रामीण क्षेत्रों में छोटे और मध्यम स्तर के एग्रो-बेस्ड उद्योगों (Agro-based industries) को बढ़ावा देना होगा।
  • वैल्यू एडिशन (Value Addition): कच्चे माल को सीधे बेचने के बजाय उसका प्रसंस्करण (Processing) कर उसकी पैकेजिंग और फिनिशिंग को बेहतर बनाना होगा, जिससे किसानों और उत्पादकों को उनकी उपज का कई गुना बेहतर मूल्य मिल सके।

कोल्ड स्टोरेज और वेयरहाउसिंग की आवश्यकता

बड़ी मात्रा में फल, सब्जियों और अन्य कृषि उत्पादों की बर्बादी (Post-harvest losses) को रोकने के लिए गाँवों के स्तर पर कोल्ड स्टोरेज, वेयरहाउस और फूड प्रोसेसिंग यूनिट्स की स्थापना को अनिवार्य बताया। इससे न केवल किसानों की आय सुरक्षित होगी, बल्कि स्थानीय स्तर पर ग्रामीण युवाओं और महिलाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे।

झारखंड के सिल्क (रेशम) उद्योग का आधुनिकीकरण

राज्य के समृद्ध संसाधनों का जिक्र करते हुए मंत्री ने कहा कि झारखंड का तसर सिल्क और रेशम अपनी शुद्धता के कारण विश्वभर में प्रसिद्ध है। लेकिन यदि हम इसमें आधुनिक तकनीकों के माध्यम से वैल्यू एडिशन, बेहतर फिनिशिंग, ट्रेंडी डिजाइनिंग और आकर्षक एम्ब्रॉयडरी का समावेश कर दें, तो हमारा सिल्क उद्योग वैश्विक बाजार में किसी भी बड़े अंतरराष्ट्रीय ब्रांड को कड़ी टक्कर देने और अधिक प्रतिस्पर्धी बनने में पूरी तरह सक्षम है।

गरिमामयी उपस्थिति और सामूहिक संकल्प

इस ऐतिहासिक और प्रेरणादायी प्री-लॉन्च समारोह को सफल बनाने में मारवाड़ी सहायक समिति के शीर्ष नेतृत्व और पूरी टीम ने सराहनीय भूमिका निभाई। कार्यक्रम में मुख्य रूप से निम्नलिखित पदाधिकारी और गणमान्य सदस्य उपस्थित रहे, जिन्होंने मुख्य अतिथि का भव्य स्वागत किया:

  • श्री पवन शर्मा (अध्यक्ष, मारवाड़ी सहायक समिति)
  • श्री विनोद जैन (सचिव)
  • श्री अरुण भारतीय (प्रोजेक्ट चेयरमैन)
  • विनीता सिंघानिया (संयोजक)
  • मोनिका गोयंका (संयोजक)
  • शिखा जैन अग्रवाल (संयोजक)
  • खुशबू अग्रवाल (संयोजक)
  • मोनिका अग्रवाल (संयोजक)
  • श्री सुमित लाठ (संयोजक)
  • प्रियंका जैन (संयोजक)

इनके अलावा समिति के कई अन्य सह-संयोजक, प्रबुद्ध महिला सदस्य और शहर के गणमान्य व्यवसायी बड़ी संख्या में उपस्थित थे।

निष्कर्ष: ‘अपनों की उड़ान’ से आत्मनिर्भरता का नया आसमान

रांची के मारवाड़ी भवन में संपन्न हुआ यह समारोह केवल एक प्रदर्शनी का प्री-लॉन्च नहीं था, बल्कि यह शहरी व्यावसायिक कौशल और ग्रामीण महिला शक्ति (Women Power) के बीच एक मजबूत सेतु निर्माण की शुरुआत थी। मंत्री दीपिका पांडेय सिंह के विचारों ने वहां उपस्थित सभी महिला उद्यमियों में एक नई ऊर्जा और उत्साह का संचार किया। 115 वर्षों से सेवा में जुटी मारवाड़ी सहायक समिति ने इस भव्य आयोजन के माध्यम से एक बार फिर यह साबित कर दिया कि वे समाज के हर वर्ग को साथ लेकर, उनके सपनों को “अपनों की उड़ान” देने और राज्य के समग्र विकास में अपनी अग्रणी भूमिका निभाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं।

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